गौमाता के मुद्दे पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौमाता को “राष्ट्रमाता” का दर्जा देने की मांग करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से ठोस कदम उठाने को कहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य स्तर पर गौमाता को “राज्य माता” और राष्ट्रीय स्तर पर “राष्ट्र माता” घोषित किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गौमाता को सामान्य पशु की श्रेणी से अलग कर विशेष पहचान दी जानी चाहिए।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि जनभावनाओं के बावजूद गौ संरक्षण के मुद्दे पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई जा रही है। उनके अनुसार, सरकारों को इस दिशा में कड़े कानून बनाकर प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
इसी अभियान के तहत उन्होंने गोरखपुर से 3 मई को “गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा” की शुरुआत की, जो प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली है।
यात्रा के दौरान वे विभिन्न स्थानों पर लोगों से संवाद कर गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ा रहे हैं और समाज से सक्रिय भागीदारी की अपील कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गौमाता के सम्मान और सुरक्षा के लिए सरकार और समाज दोनों की संयुक्त पहल जरूरी है।